गर्मी और उमस के बीच बिजली विभाग की लचर व्यवस्था के कारण जनता बेहाल!
रायपुर, छत्तीसगढ़। 17 मई 2026 :
स्वराज मिशन की खास रिपोर्ट :
जब बिजली का बिल समय पर नहीं भरा जाता, तो विभाग बिना देरी किए कनेक्शन काट देता है। लेकिन जब घंटों बिजली गुल रहे और जनता को जवाब देने वाला कोई ना हो, तो इसकी सजा किसे मिलनी चाहिए? यह सवाल आज छत्तीसगढ़ की राजधानी के हजारों अभिभावक और त्रस्त नागरिक मुख्यमंत्री से पूछ रहे हैं।
बेबस पिता और बिलखते बच्चे
पिछली रात 5 घंटों से अधिक अघोषित बिजली कटौती ने सामान्य जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे हृदयविदारक स्थिति उन घरों की है जहां छोटे बच्चे गर्मी से बेहाल हैं। एक स्थानीय निवासी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, “बच्चे बार-बार पूछ रहे हैं कि पापा बिजली कब आएगी? लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं है। बिजली दफ्तर का फोन कोई उठाता नहीं और विभाग की हेल्पलाइन 1912 केवल रिंग होकर कट जा रही है।”
हेल्पलाइन नंबर महज एक औपचारिकता?
सरकार द्वारा जारी किया गया टोल-फ्री नंबर 1912 आज पूरी तरह निष्क्रिय साबित हुआ। उपभोक्ताओं की शिकायत है कि जब भी संकट की स्थिति होती है, यह नंबर या तो ‘बिजी’ आता है या फिर कोई कर्मचारी इसे रिसीव नहीं करता। स्थानीय बिजली घरों (Sub-stations) में कॉल करने पर फोन को ‘क्रेडल’ से हटाकर रख दिया गया है, ताकि कोई संपर्क न कर सके।
मुख्यमंत्री से सीधे सवाल: विभाग की लापरवाही पर ‘पेनल्टी’ कब?
जनता का आक्रोश अब सीधे प्रशासन और सरकार की ओर मुड़ गया है। नागरिकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कुछ कड़े सवाल उठाए हैं:
- समान दंड का सिद्धांत क्यों नहीं? यदि बिल न भरने पर उपभोक्ता का कनेक्शन काटा जा सकता है, तो घंटों अघोषित कटौती और सूचना न देने पर दोषी अधिकारियों पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाता?
- जवाबदेही किसकी? जब हेल्पलाइन नंबर काम नहीं करते, तो जनता अपनी समस्या लेकर कहां जाए?
- संसाधनों का अभाव या कुप्रबंधन? करोड़ों के बजट के बाद भी बिजली ढांचे की यह स्थिति क्यों है?
जनता की मांग
सोशल मीडिया पर भी इस बिजली कटौती के खिलाफ मुहिम तेज हो गई है। लोग मांग कर रहे हैं कि बिजली विभाग को ‘सर्विस गारंटी एक्ट’ के दायरे में सख्ती से लाया जाए। यदि निर्धारित समय से ज्यादा बिजली गुल रहती है, तो उपभोक्ता के अगले बिल में कटौती (Compensation) का प्रावधान होना चाहिए।
जिन घरों में बीमार व्यक्ति होते हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की विद्युत उपकरणों की सहायता दी जाती है, वह लोग विवश दिखे और साथ ही बच्चे और ग्रहणियां बिलखते नजर आए।
विचारणीय विषय है कि जब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का यह हाल है तो अन्य क्षेत्रों में क्या हाल होगा?
फिलहाल, अंधकार में डूबी जनता अब केवल मुख्यमंत्री की दखल का इंतजार कर रही है।


