रायपुर, छत्तीसगढ़। 16 मई 2026 :
प्रकाशपुंज पांडेय की कलम से 🖊️
देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की रसोई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तक पर सीधा असर डाला है। पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर, दूध, दाल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस मुद्दे पर विपक्ष उतना आक्रामक क्यों नहीं दिख रहा, जितनी जनता उम्मीद कर रही थी?
रिपोर्ट:
राजनीतिक गलियारों में शांति क्यों?
एक ओर जहां आम जनता महंगाई की मार से परेशान है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत शांति दिखाई दे रही है।
पेट्रोल-डीज़ल मूल्यवृद्धि और कालाबाजारी –
पेट्रोल डीजल की बात करें तो दामों में वृद्धि के कारण महंगाई और बढ़ रही है। साथ ही कलाबाजारियों की संख्या भी बढ़ रही है। जहां पेट्रोल पंपों पर आज भी लम्बी लाइन देखने को मिलती है, वहीं पर पेट्रोल पंपों के मालिकों द्वारा सदा पेट्रोल की जगह पावर पेट्रोल को जानबूझकर खपाया जा रहा है और जनता की जेब पर ढाका डाला जा रहा है। लेकिन प्रशासन और शासन इस गम्भीर समस्या को नजरअंदाज किए हुए हैं।
विपक्ष की विवशता –
विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष कई राज्यों के चुनावी समीकरणों और आंतरिक रणनीतियों में उलझा हुआ है, जिसके कारण महंगाई जैसे जनहित के मुद्दे पर बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा नहीं हो पा रहा।
पेट्रोल-डीज़ल मूल्यवृद्धि से बढ़ती महंगाई –
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी पड़ता है।
दूध कंपनियों द्वारा दाम बढ़ाने के बाद अब आम परिवारों का मासिक बजट और अधिक प्रभावित होने लगा है।
किसानों पर दुष्प्रभाव –
इसका असर खेती पर भी पड़ता है क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन के कारण कृषि से संबंधित उर्वरक और बीज के दाम भी बढ़ जाते हैं। साथ ही किसान को अपने अनाज को एक जगह से दूसरी जगह और मंडियों तक ले जाने के लिए भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। कृषि में उपयोग होने वाले ईंधन आधारित उपकरणों पर भी अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है।
विपक्ष की चुप्पी!
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब महंगाई हर घर की समस्या बन चुकी है, तब विपक्ष सड़क से संसद तक उतना मुखर क्यों नहीं है? क्या राजनीतिक दल केवल चुनावी मुद्दों पर सक्रिय होते हैं या फिर महंगाई अब राजनीति का प्राथमिक विषय नहीं रह गई?
जनता की राय:
- “कमाई वही है, लेकिन खर्च दोगुना हो गया है।”
- “हर चीज महंगी हो रही है, लेकिन हमारी आवाज उठाने वाला कोई नहीं दिखता।”
- “सत्ता और विपक्ष दोनों को जनता की परेशानियों पर गंभीर होना चाहिए।”
निष्कर्ष:
महंगाई आज देश के हर वर्ग को प्रभावित कर रही है। ऐसे में लोकतंत्र में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब देखना होगा कि आने वाले समय में विपक्ष इस मुद्दे को कितने असरदार तरीके से उठाता है और जनता को राहत दिलाने के लिए क्या पहल करता है।


