छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा करने के लिए प्रयासरत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का व्यक्तित्व ही उनकी पहचान है, पार्टी में उनका नेतृत्व और उनकी लगन का ही परिणाम है कि 15 साल बाद आज प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है। लेकिन पार्टी के सफल संचालन और कुशल नेतृत्व के लिए जाने जाने वाले भूपेश सरकार के पार्टी के ही कुछ नेता ऐसे हैं जो उनके इस व्यक्तित्व को धूमिल करने के लिए काफी है।

ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ भूपेश बघेल प्रदेश का संचालन कर रहे हैं, पर उनकी पारदर्शिता और ईमानदारी पर उस वक्त उंगली उठाने का मौका विपक्ष को मिल जाता है जब कुछ गैर जिम्मेदार और अपराधों में लिप्त व्यक्तियों को निलंबित करने की बजाय उन्हें एक महत्वपूर्ण पद पर बैठे रहने दिया जाता है।

बात कर रहे हैं आईएएस अनिल कुमार टुटेजा की, जो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेहद करीबी माने जाते हैं। अनिल कुमार टुटेजा जब नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी थे, तब नान घोटाले में प्रमुखता से उनका नाम सामने आया था। साथ ही उनके खिलाफ़ चार्जशीट भी उच्चन्यायालय के समक्ष पेश की गई थी। बावजूद इसके, इनके खिलाफ़ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट आज भी वे एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन हैं।

तो क्या ऐसे में अनिल कुमार टुटेजा जो उनके खिलाफ साक्ष्य हैं उसे प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे?

एक एडीजी के आरोप सिद्ध नहीं होने के बाद भी उन्हें तुरंत पद से निलंबित करना वहीं दूसरी ओर एक आईएएस के खिलाफ़ साल भर पहले चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद भी उन्हें पद में रहने दिया जाना कहाँ तक न्याय संगत है? यह बात उस वक्त और गंभीर हो जाती है जब छोटे अधिकारियों को चार्ज शीट प्रस्तुत होते ही तुरंत सस्पेंड कर दिया जाता है।

हाल ही का मामला ले लेते हैं जब एडीजी जीपी सिंह के ऊपर जांच बैठाई गई लेकिन बिना उनके ऊपर लगे आरोप सिद्ध हुए ही उन्हें निलंबित कर दिया गया। लेकिन इन महोदय को किसका संरक्षण प्राप्त है या इनके पास ऐसी कौन सी दैवीय शक्तियां है कि चार्ज शीट प्रस्तुत होने के बावजूद भी इनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे इन्हें आज भी एक महत्वपूर्ण पद की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए यथावत रहने दिया गया है।

बता दें कि 2015 में रायपुर की न्यायाधीश लीना अग्रवाल ने डॉ. अनिल कुमार टुटेजा जो रायपुर निगम आपूर्ति के तत्कालीन एम.डी. थे, उनके ऊपर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उन्होंने दिनांक 30/05/2014 से दिनांक 16/02/2015 तक नागरिक आपूर्ति निगम रायपुर के चैयरमेन के पद पर पदस्थ रहकर जिला प्रबंधक शिवशंकर भट्ट के साथ मिलकर चावल उपार्जन की प्रक्रिया में अनेक नियमों एवं व्यवस्थागत कारणों से चावल रिजेक्शन की आशंकाओं की आड़ लेकर मैदानी अधिकारियों के द्वारा निर्णय लेने की संभावना की आड़ में राइस मिलर्स से अवैध धन राशि वसूली और भ्र्ष्टाचार में शामिल होकर अपराध जनक षड्यंत्र किया।

साथ ही अपनी जिम्मेदारी से से विपरीत जाकर पीडीएस चावल का उपार्जन कराकर संयुक्त राइस मिलर्स से अपने पद का रौब दिखाते हुए करोड़ो रुपयों का लाभ प्राप्त कर, अपने पद का दुरूपयोग किया और शिवशंकर भट्ट के साथ मिलकर बिना किसी कारण के चावल का अंतरजिला मूवमेंट आर्डर जारी कर प्राइवेट पार्टियों के हितों में काम कर शासन को करोड़ो रूपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई।


अपने अवधि में रहते हुए 2014-15 में वित्तीय नियंत्रण के अंतर्गत चावल परिवहन हेतु न्यस्त राशि मे से उपार्जन वर्ष 2014-15 में धमतरी से जांजगीर 5400 मि.टन, धमतरी से रायगढ़ 10800 मि.टन चावल का अनावश्यक परिवहन कराकर परिवहनकर्ताओं को कुल 2,18,21135 रुपए का भुगतान कराकर न्यस्त संपत्ति का बेईमानी पूर्वक उपयोग कर एक संगीन अपराध किया है, जिसके लिए उनके खिलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन इतने बड़े अपराधिक कारनामे को अंजाम देने के बावजूद अनिल कुमार टुटेजा के ऊपर कोई भी कार्रवाई नहीं करना यह एक बड़े संदेह को जन्म देती है।

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो में ऐसी घटना पंजीबद्ध होने की सूचना प्राप्त होने पर संबंधित शासकीय / अर्द्धशासी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए जो नियम बनाए गए हैं उसके अनुसार अधिक्रमित करते हुए राज्य शासन द्वारा यह निर्देश जारी किए जाते हैं कि

ब्यूरो द्वारा सूक्ष्म विवेचना के उपरांत आरोप प्रमाणित होने पर , लोक सेवक के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति तत्परतापूर्वक प्रशासकीय द्वारा प्रदान की जाए।

ब्यूरो द्वारा माननीय विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने की सूचना प्राप्त होते ही संबंधित लोक सेवक को तत्काल निलंबित किया जाय।

बावजूद इसके इन नियमों का उल्लंघन करते हुए आज दिनांक तक भी अनिल टुटेजा के ऊपर उन्हें निलंबित करना तो दूर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।

वहीं सूत्रों की मानें तो जीपी सिंह मुकेश गुप्ता को खुला संरक्षण दे रहे थे जो बात मुख्यमंत्री के करीबियों को रास नहीं आई और इस बात से तिलमिला कर ही जी पी सिंह के ऊपर यह कार्रवाई की गई। वर्ना जिस अनिल कुमार टुटेजा के खिलाफ़ चार्जशीट पेश होने के बावजूद भी आज दिनांक तक उन्हें निलंबित नहीं किया गया। तो ऐसे में बिना आरोप सिद्ध हुए ही जीपी सिंह को निलंबित नहीं किया जाना क्या एक आपसी रंजिश का नतीजा है? वहीं सूत्रों की माने तो जिस समय नान घोटाला हुआ था उस समय अनिल कुमार टुटेजा ने भूपेश बघेल को पत्र लिखकर अपनी बेगुनाही की सफाई भी दी थी।

आपको बता दें कि, स्वराज मिशन इस बात की पुष्टि नहीं करता।

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