रायपुर, छत्तीसगढ़ : 08/02/2022 :
▶100 दिन का रोजगार देने की गांरटी योजना सिर्फ कागजों में, लाखों मजदूर योजना से वंचित – भगवानू
▶️”रोजगार गारंटी” योजना मनरेगा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 12 लाख 22 हजार ग्रामीण मजदूरों को नहीं मिला रोजगार, मजदूरों के अधिकारों का हनन – JCCJ
▶मोदी सरकार के द्वारा 25% मनरेगा बजट घटाना, मजदूरों के साथ अन्याय- भगवानू
▶हरियाणा की तर्ज में मजदूरी राशि 300/- देने और झारखन्ड के तर्ज में शहरी क्षेत्र में मनरेगा योजना लागू करने की मांग – JCCJ
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य प्रवक्ता अधिवक्ता भगवानू नायक ने केंद्र सरकार की अति महत्वकांक्षी और ग्रामीण भारत में रोजगार की सबसे बड़ी योजना, महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के तहत छत्तीसगढ़ में 12 लाख 22 हजार मजदूरों को काम नहीं मिलने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा तत्कालीन यूपीए सरकार के द्वारा वर्ष 2005 में देश के ग्रामीण भारत में मजदूरों के हाथ में रोजगार देने के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंतर्गत 100 दिन की रोजगार की गारंटी योजना लाई गई परंतु यह दुर्भाग्य की बात है केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक छत्तीसगढ़ में प्रदेश में 61 लाख 39 हजार लोगों के द्वारा मांग की गई थी। परंतु इसमें से 12 लाख 22 हजार लोगों को रोजगार नहीं मिला।
इस प्रकार छत्तीसगढ़ के 12 लाख 22 हजार ग्रामीण मजदूरों के इस योजना से वंचित हुए जो उनके अधिकारों का हनन है । नायक ने कहा एक तरफ तो छत्तीसगढ़ सरकार गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की बात करती है, ग्रामीण, मजदूर , किसानों की हितैषी होने का दम्भ भरती है। वहीं जब मजदूरों को उनका हक और अधिकार देने की बारी आती है तब जमीनी हकीकत कुछ और बयाँ करती है है।
भगवानू नायक ने छत्तीसगढ़ में मनरेगा के तहत मजदूरों को दी जाने वाली मजदूरी प्रतिदिन ₹190 पर भी सवाल उठाते हुए मजदूरी राशि को बढ़ाकर हरियाणा की तर्ज पर ₹300 और झारखंड के तर्ज पर शहरी क्षेत्र में भी मजदूरों को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना लागू करने की मांग की है । उन्होंने कहा कोरोना महामारी के कारण देश भर से छत्तीसगढ़ के गरीब मजदूर अपने गृह प्रदेश वापस आए हैं जिन्हें रोजगार की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्र में ईश्रम कार्ड पोर्टल के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों ने अपना पंजीयन कराया है। ऐसे में ऐसे मजदूरों को रोजगार दिया जाना अत्यंत आवश्यक है । उन्होंने कहा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि “भारत की आत्मा गांव में बसती है, गाँव का विकास करेंगे तो भारत मजबूत होगा। ” उन्हीं के सपने के अनुरूप यह योजना तत्कालीन यूपीए सरकार ने लाई थी परंतु दुर्भाग्य की बात है कि इस योजना को जिस तरीके से लागू किया जाना चाहिए वैसा लागू नहीं किया जा रहा है । योजना रोजगार की गारंटी देता है परंतु मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। इस बार केंद्र सरकार के द्वारा भी मनरेगा की बजट को 25% घटाया है जो कि बहुत ही चिंताजनक है। केंद्र सरकार के इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और भी ज्यादा अधिक बढ़ने के आसार हैं।
जनता कांग्रेस ने केंद्र सरकार से भी मनरेगा में केंद्र की बजट की राशि बढ़ाने की मांग की है।







