नई दिल्ली : केरल में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बीच राज्य की विजयन सरकार द्वारा बकरीद के मद्देनजर कोविड-19 संबंधी पाबंदियों में छूट देने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केरल सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारसे पूछा है कि आखिर किस आधार पर कोरोना प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला किया गया है। अदालत इस मामले पर मंगलवार यानी कल सुनवाई करेगा।
आपको बता दें कि बकरीद त्योहार के मद्देनजर केरल सरकार की ओर से कोरोना प्रतिबंधों में ढील देने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया है कि सरकार द्वारा यह ढील ऐसे समय में दी जा रही है, जब राज्य में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और संक्रमण दर भी बढ़ रहा है। बताते चलें कि केरल में हाल के दिनों में कोरोना के केसों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने बकरीद के मद्देनजर पाबंदियों में ढील देने का ऐलान किया है। राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बकरीद पर खरीदारी के लिए पाबंदियों में तीन दिन की छूट का एलान किया था जिसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस और भारतीय चिकित्सा संघ ने सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना
कांग्रेस और भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह महामारी को न्योता देने जैसा है। यही नहीं आईएमए ने सरकार के फैसले को कानूनी चुनौती देने की भी चेतावनी दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि महामारी के दौर में अगर कांवड़ यात्रा गलत है तो बकरीद पर पाबंदियों में ढील देने की घोषणा भी गलत है। उन्होंने इस बाबत ट्वीट करते हुए कहा कि खासकर ऐसे राज्य में तो यह छूट पूरी तरह गलत है जो कोविड-19 के सबसे बड़े केंद्रों में एक है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कांवड़ यात्रा रोकने को लेकर दी गई टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी है। साथ ही उत्तराखंड में भी इस साल कोरोना के मद्देनजर कावंड़ यात्रा पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी प्रशासन से कहा था कि वह राज्य में कोरोना संबंधी ऐसे किसी भी नियम की अनदेखी होने से रोके, जिससे नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ता हो।

