नई दिल्ली : संसद के आगामी मानसून सत्र में जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर भाजपा के सांसद निजी सदस्यों के विधेयक पेश करेंगे। गोरखपुर से भाजपा के लोकसभा सदस्य रवि किशन और राजस्थान से राज्यसभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा 19 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र के पहले सप्ताह में क्रमश: जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर निजी सदस्यों के विधेयक पेश करने वाले हैं। एक मंत्री के अलावा किसी अन्य सदस्य द्वारा पेश किए गए विधेयक को निजी सदस्य के बिल के रूप में जाना जाता है। सरकार के समर्थन के बिना इसके कानून बनने की संभावना बहुत कम होती है।

दरअसल जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर प्रस्तावित विधेयक देश में राजनीतिक विमर्श का पुराना मुद्दा रहा है और ये भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भी रहा है। लोकसभा में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के प्रतिनिधि रवि किशन और राजस्थान से राज्यसभा के सदस्य किरोड़ी लाल मीणा 19 जुलाई से आरंभ हो रहे संसद सत्र के पहले सप्ताह में जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर गैर सरकारी विधेयक प्रस्तुत करेंगे।

ग़ौर करने वालीं बात यह है कि रवि किशन जो जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर गैर सरकारी विधेयक प्रस्तुत करेंगे उनके खुद के चार बच्चे है जिन्होंने ख़ुद जनसंख्या नियंत्रण की नीति को नहीं अपनाया है।

सोशल मीडिया पर रवि किशन को लेकर काफी बयानबाजी

सोशल मीडिया पर रवि किशन को लेकर काफी बयानबाजी हो रही है। रवि किशन के 4 बच्चे होने के बावजूद जनसंख्या नियंत्रण पर विधेयक प्रस्तुत करने पर digital initiatives के को-फाउंडर Dr Gaurav Garg ने ट्विटर के जरिए प्रतिक्रिया दी है कि गोरखपुर के सांसद रवि किशन 23 जुलाई को जनसंख्या नियंत्रण पर संसद में एक निजी सदस्य विधेयक पेश करेंगे। मजे की बात यह है कि उनके स्वयं 4 बच्चे हैं।

साथ ही आपको बता दें कि विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-2030 जारी की थी। उन्होंने कहा था कि बढ़ती हुई जनसंख्या विकास में एक बड़ी बाधा है. वहीं विश्व हिन्दू परिषद की ओर से कहा गया है कि दो बच्चों वाली नीति जनसंख्या नियंत्रण की ओर ले जाती है। लेकिन दो से कम बच्चों की नीति आने वाले समय में कई नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकती है।

विश्व हिन्दू परिषद द्वारा अपनी चिट्ठी में सवाल खड़े किए गए हैं कि अगर वन चाइल्ड पॉलिसी लाई जाती है तो इससे सामाज में आबादी का असंतुलन पैदा होगा. ऐसे में सरकार को इस बारे में फिर से विचार करना चाहिए, वरना इसका असर नेगेटिव ग्रोथ पर हो सकता है।

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