रायपुर। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले वर्ष आनन-फानन में किए गए लॉकडाउन में मजदूरों ने जो पीड़ा झेली उसे जानने और मजदूरों के हितों में फैसले के लिए राजधानी रायपुर में जनता का फैसला कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी समेत राज्य सरकार के प्रतिनिधिगण शामिल हुए।

प्रवासी मजदूरों के हितों की सेवा के लिए समर्पित देश के सभी राज्यों में इस तरह का कार्यक्रम होना है जिसकी शुरुआत पाश्चात्य केंद्र हॉल, बायरन बाजार, रायपुर में की गई। 4 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन नेशनल फाउंडेशन ऑफ इंडिया और सॉक्रेट्स के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रवासी मजदूरों को बुलाया जाएगा और उनकी समस्या जानी जाएगी। वहीं इस कार्यक्रम में सोशल वर्कर्स, मंत्री,अफसरों को भी आमंत्रित किया गया है 4 दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

सत्र की शुरुआत में, प्रवासी श्रमिकों की नागरिक जूरी ने विशेषज्ञों, नागरिक समाज और सरकार के प्रतिनिधियों से ज्वलंत प्रश्न पूछे।
सत्र में,सीएलआरए सुधीर कटियार ने जूरी को सूचित किया कि असंगठित श्रमिकों का रिकॉर्ड रखने का प्रयास किया जा रहा है।

अंतर्राज्यीय प्रवासी कामगार अधिनियम के अनुसार श्रम विभाग को प्रवासी श्रमिकों का रिकॉर्ड रखना चाहिए। श्रमेव जयते योजना के तहत असंगठित कामगारों को यूनिक आईडी देने का प्रावधान है। श्रमिकों को पीएफ, बीमा और नियोक्ता पंजीकरण जैसी सुविधाएं मिलें।

मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी ने जूरी को सरकार की उन योजनाओं के बारे में बताया जो प्रवासी श्रमिकों के लिए उपयोगी थीं। उन्होंने जूरी को सरकार की सोच को समझाने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पलायन को रोकना चाहती है और स्थानीय निवासियों को उनके गांवों के पास आजीविका मिलनी चाहिए।

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