कहावत है कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है और ऐसी मछली आज के समय में सभी राजनीतिक, प्रशासनिक, विभागीय समेत प्रायः सभी जगह पाई जाती है जिसके चलते पूरे एक महकमे को बदनामी का दंश झेलना पड़ता है। फिलहाल आज हम ऐसे कुछ पत्रकारों के बारे में बात कर रहे हैं जो स्वयं तो किसी बड़े न्यूज चैनल में या किसी बड़े न्यूज संस्था में पदस्थ नहीं है लेकिन वेब पोर्टलों के पत्रकारों को नीचा दिखाने उन पर धाक जमाने या उनको नसीहत देने से पीछे नहीं हटते। और प्रेस क्लब के अहम पदों पर काबिज होकर अन्य पत्रकारों के हक में डाका डालने से भी पीछे नही हटते।

राजधानी रायपुर स्थित प्रेस क्लब में ऐसे लोगों का बोलबाला है जो कहने को तो खुद को पत्रकार और प्रेस क्लब का अध्यक्ष बताते हैं लेकिन इसकी आड़ में सच्चाई से लोगों को अवगत कराना तो दूर इस पद का उपयोग केवल असंवैधानिक कृतियों को पूरा करने के लिए करते हैं। इतना ही नही अध्यक्ष पद का रूआब इस तरह झाड़ते हैं जैसे की पूरी की पूरी सरकार इनके जेब में हो। और ऐसा शायद है
भी यही कारण है कि बीएसयूपी में पत्रकारों को घर आवंटित करने वाले मामले में प्रेस क्लब के अध्यक्ष,पदाधिकारी और नगर निगम की मिलीभगत से पत्रकारों और गरीबों के हक में डाका डालते हुए अपने परिवार वालों को और जिनका पत्रकारिता से दूर दूर तक का नाता नहीं है उनके नाम से पत्रकार होने का हवाला देते हुए घर आवंटित करवाया गया है।

कई लोगों के नाम तो ऐसे हैं जिन्हें पत्रकारिता का मतलब ही नहीं पता तब उनका पत्रकार होना तो दूर की बात है, इसके बावजूद भी पत्रकारों को घर आवंटित हुए लिस्ट में इन लोगों के नाम शामिल है। लेकिन आखिर जब यह पत्रकार नहीं तो इन्हें घर पत्रकार के नाम से आवंटित कैसे हुआ?
ऐसे करने के पीछे प्रेस क्लब के माननीय अध्यक्ष और पदाधिकारियों की क्या मंशा थी? एक व्यक्ति के पूरे परिवार वालों के नाम से अलग-अलग घर आवंटित करने पर आखिर क्यों नगर निगम ने कोई सवाल खड़े नहीं किए?
क्यों इस बात की तफ्तीश नहीं की गई कि क्या वाकई जिन पत्रकारों के नाम से घर आबंटित किया गया है वह वाकई पत्रकार हैं या नहीं? यह सारे सवाल सिर्फ और सिर्फ केवल एक बात की ओर इशारा करते हैं और वह है घोटालेबाजी! जो नगर निगम और अपने आप को सम्माननीय पत्रकार कहने वाले प्रेस क्लब के ग्रुप मेंबरों द्वारा बिना किसी डर के किया गया है।
बीएसयूपी कॉलोनी जो एक गरीब तबके के लोगों के लिए आश्रय का काम करती है। गरीबों के उस आश्रय पर भी कुछ लालची और स्वार्थी लोग अपना कब्जा जमा लेते हैं और उनके इस घोटालों पर सोने पर सुहागा तब हो जाता है जब पत्रकार जगत का नाम खराब करने वाले ऐसे भ्रष्ट लोगों और नगर निगम अधिकारियों की मिली जुली सरकार बन जाती है।
लेकिन पद का दुरुपयोग कर गरीबों के हक को कुचलने वाले लोगों की कुरीतियों को उजागर कर जरूरतमंदों की मदद में आवाज उठाने वाले कुछ सेवाभावी लोग भी होते हैं जो निस्वार्थ भाव से गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते हैं। कुछ ऐसा ही सेवाभावी कार्य किया है रायपुर निवासी नितिन लॉरेंस ने, जिन्होंने जरूरतमंदों के साथ हो रही नाइंसाफी को लेकर प्रमुखता से आवाज उठाते हुए माननीय उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करते हुए ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं इस विषय में जब हमारे संवाददाता ने याचिकाकर्ता नितिन लॉरेंस से इस सम्बंध में जानकारी चाही कि ऐसा करने के पीछे उनकी मंशा क्या थी तो उन्होंने कहा कि

मैंने एक दिन अचानक किराए के मकान में रह रहे कुछ मीडिया कर्मियों से चर्चा करते हुए कहा कि जब प्रेस क्लब में बीएसयूपी कॉलोनी में मकान आवंटन कराने की प्रक्रिया चल रही है तो आप लोग किराए के मकान को छोड़कर क्यों bsup कॉलोनी में मकान नहीं ले लेते? तब उन्होंने बताया कि यह आवंटन सिर्फ प्रेस क्लब के अध्यक्ष और कुछ पदाधिकारी अपने संबंधित लोगों को ही आवंटित करा रहे हैं। जरूरतमंदों को देखकर नहीं बल्कि अपने करीबी और हितैषियों को ही मकान दिलवा रहे हैं। जब उन्होंने मुझे यह कहा तब मुझे यह बात नहीं जँची और मैंने नगर निगम में आरटीआई लगाकर इस संबंध में जानकारी मांगी कि अब तक कितने पत्रकारों को बीएसयूपी कॉलोनी में मकान आवंटन हो चुका है हालांकि आरटीआई में मेरे द्वारा मांगे गए जवाब के संबंध में पूरी जानकारी तो नहीं मिली लेकिन जितनी भी जानकारी उनके द्वारा दी गयी उसमें जिन पत्रकारों को मकान आवंटन होने की बात लिखी गई है उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जिनका पत्रकारिता जगत से कोई नाता ही नहीं तो कुछ लोग ऐसे हैं जो प्रेस क्लब के अध्यक्ष और पदाधिकारी के बेहद करीबी हैं। लेकिन वास्तव में जो जरूरतमंद हैं, जिनको इस मकान की बेहद आवश्यकता है ऐसे लोगों को मकान आवंटित नहीं किया गया। प्रेस क्लब के अहम पद में बैठे लोगों द्वारा किये गए इस भ्रष्ट रवैये से बाकी पत्रकारों की भी छवि धूमिल होने के संशय से मैंने माननीय उच्च न्यायालय में इस मामले की जांच हेतु जनहित याचिका लगाई, जिसने मैंने यह मांग किया कि नगर निगम के ऐसे अधिकारी जिन्होंने इन पत्रकारों के गलत कृतियों में उनका साथ दिया है, जिन्होंने पत्रकारों द्वारा दिए गए दस्तावेजों के बिना जांच परख किए बिना दस्तावेजों का सत्यापन किए आंख मूंदकर केवल प्रेस क्लब के अनुशंसा पर ऐसे लोगों के नाम में भी मुहर लगा दिया जिनके पास पहले से ही अपने दो दो तीन तीन मकान है उन पर कार्यवाई हो।

