रायपुर, छत्तीसगढ़ / 25 अगस्त 2022 :

कर्मचारी संगठनों की एकजुटता

छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों की मांगों को लेकर आंदोलन जारी है। जुलाई में इस आंदोलन का आगाज हुआ था जो कि प्रथम चरण में कुछ समय के लिए टल गया था। लेकिन अगस्त खत्म होते होते छत्तीसगढ़ में कर्मचारी संगठन पुनः एक बार आंदोलित हो गए हैं। इस आंदोलन में लगभग सभी कर्मचारी संगठन एक साथ हैं। कर्मचारियों की मांग खासकर महंगाई भत्ते को लेकर है।

अधिकारी काम नहीं कर पा रहे हैं

प्रथम चरण के आंदोलन में डेली वेजेस वाले कर्मचारी अपना काम कर रहे थे जिससे अधिकारीयों का कुछ काम चल रहा था। लेकिन इस बार उन्हें भी कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों द्वारा काम पर आने नहीं दिया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जो र्कामचारी काम पर जाना चाहते हैं उन्हें गाली-गलौज कर धमकी भी दी जा रही है। इस कारण से अधिकारी भी काम नहीं कर पा रहे हैं।

जिद पर अड़े हैं

अब सोचने वाली बात है कि सभी को कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच कई दौर की बैठकें भी चली लेकिन सरकार की भी मजबूरी है कि वह सभी मांगे पूरी नहीं कर सकती है लेकिन यह दायित्व कर्मचारी संगठनों का भी है कि 10 में से अगर 6 या 7 मांगे सरकार मान रही हैं तो उन्हें भी परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के हित में प्रदेश की जनता के हित में कार्य पर वापस लौट जाना चाहिए, लेकिन वह अभी भी अपनी जिद पर डटे हुए हैं।

आखिर किसका हो रहा है नुकसान?

आखिर इन सब परिस्थितियों के कारण नुकसान किसका हो रहा है? यकीनन नुकसान सिर्फ और सिर्फ छत्तीसगढ़ की आम जनता को हो रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार का पैसा बर्बाद हो रहा है क्योंकि ऑफिस तो शुरू ही हैं, ऑफिसों में बिजली पानी और अन्य जो व्यवस्थाएं हैं उसके कारण जो पैसा बर्बाद हो रहा है आखिर उसका कारण कौन है? सरकार या फिर यह कर्मचारी संगठन? यह आपको सूचना होगा!

टाइमिंग पर उड़ता है सवाल!

अब ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हैं और आप सबको यह सोचना होगा कि इतने वर्षों से यह कर्मचारी संगठन कहां थे? इसीलिए इनकी टाइमिंग पर सवाल उठता है। एक तरफ जहां बेरोजगारी चरम सीमा पर है, लोगों को अवसर नहीं मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिन्हें सरकारी नौकरियां प्राप्त हैं, वे अपनी जिम्मेदारी को छोड़कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

जिम्मेदारी तो सब की बनती है

यह बात जायज है कि उनकी भी मांगो पर विचार करने की जिम्मेदारी सरकार की है लेकिन उनकी भी जो जिम्मेदारियां है प्रदेश और प्रदेश की जनता के प्रति क्या वह इन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे हैं या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। यह जानना बहुत जरूरी है।

क्या आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक पार्टी का हाथ है?

कहीं ऐसा तो नहीं कि इस आंदोलन के पीछे राजनीति छुपी हुई हो क्योंकि अगले साल के विधानसभा चुनाव की तैयारी सभी पार्टियों ने अभी से शुरू कर दी है तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस आंदोलन के खत्म ना होने के पीछे कोई राजनीतिक खिचड़ी पक रही हो। स्वराज मिशन के सूत्रों के मुताबिक इस आंदोलन के पीछे आम आदमी पार्टी (AAP) का भी हाथ हो सकता है जो कि छत्तीसगढ़ में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश करने की कोशिश कर रही है। अब इस सवाल का उत्तर आपको ढूंढना होगा कि क्या वाकई इस आंदोलन के पीछे राजनीति है या कुछ और?

इंतजार करें अगले अपडेट के साथ जल्द ही हाजिर होंगे तब तक के लिए पढ़ते रहिए स्वराज मिशन और सर आज मिशन पर खास लोगों के इंटरव्यू देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें https://youtube.com/channel/UCccCB0zVht_FPLlvrL_GowQ
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