रायपुर, छत्तीसगढ़ : 11/05/2022
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट और विसलब्लोअर संजीव अग्रवाल ने मीडिया के माध्यम से कहा है कि निजी विश्वविद्यालयों में फर्जी डिग्रियाँ बाटने का कारोबार धड़ल्ले से फलफूल रहा है और पैसों के बदले डिग्रियों का ये सब फर्जीवाड़ा राज्य शासन के अफसरों की मिली भगत और संरक्षण के बिना संभव नहीं है।
यही वजह है कि ऐसे विश्वविद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय राज्य शासन और उसके अधिकारी ऐसे संस्थानों को संरक्षण देने और एन – केन – प्रकारेण बचाने में पूरी ताकत से जुटे हैं।
संजीव अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा खुल्लमखुल्ला पैसे लेकर फर्जी डिग्रियों के बाटने के कारोबार के लिए जितने दोषी निजी विश्वविद्यालय हैं उससे कहीं ज्यादा दोषी शासन के अफसर हैं, जिनके पास जानकारी, शिकायत और पुख़्ता सबूत होने के बाद भी इन निजी विश्वविद्यालयों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
इसीलिए मेरी मांग है कि इस फर्जीवाड़े की जांच सीबीआई करे और जांच के दायरे में सिर्फ़ निजी विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि वे सभी शासन के अधिकारी और उनकी भूमिका भी हो जिनके ऊपर ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने और कार्रवाई करने की ज़िम्मेदारी है।
फर्जी डिग्री बांटने वाले निजी विश्वविद्यालय एवं छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व यूजीसी के अधिकारीयों के संरक्षण के बिना फर्जी डिग्री नहीं बन सकती है। मुझे ऐसी उम्मीद है कि यह सब लोग जेल की सलाखों के पीछे हो और जल्द होंगे।
संजीव ने कहा कि, “हमने माननीय उच्च न्यायालय से मांग की है कि इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाय, जिससे फर्जी डिग्री बांटने वाले निजी विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व यूजीसी के अधिकारी जिनकी इसमें मिलीभगत है, वह सब जेल की सलाखों के पीछे हों और आज के युवा जो पढ़ाई करते हैं जो पीछे रह जाते हैं उनका भविष्य खराब न हो।

