संक्षिप्त जानकारी
छत्तीसगढ़ में काफी समय से मुख्यमंत्री रिप्लेसमेंट कि खबरें ज़ोरों पर हैं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में काँग्रेस पार्टी को अप्रत्याशित और ऐतिहासिक बहुमत मिल था। 90 विधानसभा सीटों वाले इस प्रदेश में काँग्रेस के पास आज 70 सीटें हैं। तत्कालीन नाटकीय परिस्थितियों में छत्तीसगढ़ काँग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उस वक्त अकेले वो ही नहीं थे, चार दावेदार और थे, तत्कालीन दुर्ग सांसद व प्रदेश के वर्तमान गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, प्रदेश के वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत, तत्कालीन प्रदेश काँग्रेस के अध्यक्ष व प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष व प्रदेश के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री त्रिभुनेश्वर शरण सिंहदेव (T S BABA)

कौन बनेगा मुख्यमंत्री
लेकिन उस समय कौन बनेगा मुख्यमंत्री (Kaun Banega Mukhyamantri) ये सबसे बाद मुद्दा था, जिसका कारण था दावेदारी। सूत्रों की मानें तो, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के लिए तत्कालीन काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहली पसंद थे, ताम्रध्वज साहू, जिनका नाम लगभग तय हो चुका था। लेकिन बाकी तीन दावेदारों को इस नाम पर आपत्ति थी, मौके कि गंभीरता को देखते हुए सोनिया गांधी के करीबी, डॉ चरण दस महंत ने विधानसभा अध्यक्ष बनाना स्वीकार कर लिया और रेस से हट गए। बात दें कि 2018 के जून माह तक भारत के पूर्व केन्द्रीय मंत्री, डॉ महंत का नाम काँग्रेस पार्टी के संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में ज़ोरों पर सुर्खियों में था। उस वक्त वे प्रदेश काँग्रेस के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष थे। फिर बचे दोनों लोगों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर बात नहीं बन पा रही थी। अंत में टी एस सिंहदेव और भूपेश बघेल में ढाई – ढाई साल के लिए बारी – बारी से मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति बनी। अब बात अटक गई कि पहले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? तो दोनों दावेदारों में पुनः सहमति बनी कि पहले ढाई साल भूपेश बघेल और उसके बाद के ढाई साल टी एस सिंहदेव मुख्यमंत्री बनेंगे।
ढाई साल बाद शुरू हुई चर्चा
यही कारण है कि 17 दिसम्बर 2018 को भूपेश बघेल के छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद 16 जून 2021(ढाई साल बाद) से ही छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रिप्लेसमेन्ट कि खबरें ज़ोरों पर हैं। लेकिन लगभग 4 महीनों बाद आज तक छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ही मुख्यमंत्री पद पर आसीन हैं। हाँलाकी, छत्तीसगढ़ काँग्रेस के प्रभारी, पन्ना लाल पुनिया ने ऐसे किसी भी फॉर्मूले को खारिज कर दिया है, प्रदेश काँग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने साफ कर दिया है कि न वे भूपेश बघेल के साथ हैं और न ही टी एस सिंहदेव के साथ, वे तो संगठन के साथ हैं। लेकिन विगत दिनों जो कुछ छत्तीसगढ़ में घटित हुआ है, उससे स्पष्ट है कि ढाई – ढाई साल के फॉर्मूले में सच्चाई तो है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बीच – बीच में मीडिया के सवालों पर कहते हैं कि अगर हाइकमान कहे तो मैं तुरंत इस्तीफ़ा दे दूंगा, टी एस बाबा कहते हैं कि प्रकृति में परिवर्तन ही शशवत सत्य है, हर कोई टीम का कप्तान बनना चाहता है, ये बातें पार्टी के अंदर की हैं, लेकिन अब बाहर या गई हैं, फैसला अभी आलाकमान के पास सुरक्षित है, मुझे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर पूरा भरोसा है, आदि।
खुल गई बात, कुर्सी बचाने की कवायद?
अभी कुछ दिनों पहले लगभग 5 दर्जन कॉंग्रेसी विधायक भी दिल्ली में डेरा डाले हुए थे, फिर 3 दिनों बाद वापस आने के बाद कुछ दिनों बाद पुनः दिल्ली जाना, यही नहीं निगम मंडलों के अध्यक्ष, सदस्य, काँग्रेस पार्टी के नेता, सदस्य, महापौर, यहाँ तक की सरकारी ठेकेदार भी समय – समय पर दिल्ली भ्रमड़ पर रहते हैं, वो भी कोविड काल में जान हथेली पर ले कर। रायपुर एयरपोर्ट पर नारे लग रहे थे, “छत्तीसगढ़ अड़ा हुआ है, दाऊ (भूपेश बघेल) के साथ खड़ा हुआ है।” दिल्ली में नारे लग रहे थे कि “छत्तीसगढ़ डोल रहा है, बाबा बाबा बोल रहा है।” टी एस बाबा भी अभी हाल ही में अपने स्वास्थ्य कारणों से लगभग एक माह दिल्ली में ही थे, भूपेश बघेल, पी. एल. पुनिया, के. सी. वेणुगोपाल, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बीत बैठकों की खबरें भी शनै शनै आती रहती हैं। अब प्रश्न यह है कि जब मुख्यमंत्री रिप्लेसमेंट कि कोई बात है ही नहीं तो इतनी मेहनत और नूरकसशी क्यों की जा रही है।
ज्योतिष गुरु की भविष्यवाणी
तो इन सब बातों के बीच स्वराज मिशन न्यूज के ज्योतिष विभाग के प्रमुख, मुंबई, महाराष्ट्र निवासी, ज्योतिष गुरु नीलकंठ जोशी (जिनकी 7 पीढ़ियाँ ज्योतिष शास्त्र के क्षेत्र में कार्यरत हैं), ने अपनी ज्योतिष गाड़ना से बताया है कि, फिलहाल इस माह (अकतूबर) में तो मुख्यमंत्री रिप्लेसमेंट का कोई योग नहीं है, लेकिन नवंबर 2021 से जनवरी 2022 तक पूरी संभावना है कि छत्तीसहगढ़ में मुख्यमंत्री बदल जाए। पंडित नीलकंठ गुरुजी ने स्वराज मिशन के एडिटर – इन – चीफ, समाजसेवी, राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ट पत्रकार प्रकाशपुंज पाण्डेय से चर्चा के दौरान बताया है कि, अभी अकतूबर माह तक तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कि ग्रह दशा, टी एस सिंहदेव की ग्रह दशा के मुकाबले में मजबूत है, किन्तु, नवंबर 2021 से जनवरी 2022 के बीच सिंहदेव बाबा के ग्रह मजबूत हैं, जिसका प्रभाव आने वाले समय में देखने को मिलेगा। यही नहीं, इस गाड़ना में राहुल गांधी के ग्रह नक्षत्रों की भी गाड़ना की गई है। अब देखना रोचक होगा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में क्या क्या परिवर्तन होते हैं, वैसे पंडित नीलकंठ गुरुजी की भविष्यवाणियाँ अब तक तो सच ही साबित हुई हैं।

नोट - यह रिपोर्ट किसी भी व्यक्तिविशेष की बड़ाई या किसी कि अवहेलना के लिए नहीं बनाई गई है, न ही किसी कि भावना को ठेस पनहुंचाने के लिए। इस रिपोर्ट का आधार पूर्णतः खबरों व सूत्रों से प्राप्त जानकारियाँ है। ज्योतिष शास्त्र भारत की सनातन परंपरा और सभ्यता का एक अभिन्न यंग है, जिसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।
