पंजाब, राजस्थान के बाद, अब छत्तीसगढ़ में भी राजनीतिक पारा हुआ हाई – पढ़िए पूरा घटनाक्रम
पंजाब और राजस्थान के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी सियासी पारा बढ़ने लगा है। 17 जून को छत्तीसगढ़ में काँग्रेस की भूपेश सरकार को ढाई साल पूरे होने के पहले ही, मुख्यमंत्री बदलने की खबरें शनै – शनै आती रही हैं, जिसका सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर दिन नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण कि अलग-अलग तारीखें शगूफ़ों के रूप में चर्चा का विषय बनी रहती हैं। यहाँ तक कि जो खबरें काँग्रेस पार्टी को भी नहीं पता रहतीं हैं, वो भी तथाकथित बुद्धिजीवी लोग काँग्रेस के बारे में बताते रहते हैं। लेकिन आजकल तो एक ऐसा मुद्दा गरमाया हुआ है, जिससे सीधे तौर पर एक मंत्री पर बेहद ही संगीन आरोप लग रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
असल में दो दिन पहले, छत्तीसगढ़ के एक कॉंग्रेसी विधायक बृहस्पति सिंह ने अपनी ही पार्टी की सरकार के कद्दावर मंत्री और संभावित ढाई साल बाद के मुख्यमंत्री, टी एस सिंहदेव पर अपनी हत्या करवाने की आशंका का आरोप लगा दिया है।
रमानुजगंज के इस विधायक के आरोप के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है। विधायक बृहस्पति सिंह के लगाए गए आरोपों के अनुसार, फॉलो वाहन से स्थानीय बंगाली चौक में तोड़फोड़ और गाड़ी में सवार जवानों से दुर्व्यवहार किया गया। विवाद, ओवरटेक को लेकर हुआ और युवकों ने विधायक को कवर कर रही फॉलो गाड़ी को बीच सड़क पर अपनी गाड़ी अड़ाकर रोक दिया। फिर गाड़ी में तोड़फोड़ के साथ ही जवानों से गाली – गलौज किया। विधायक बृहस्पति सिंह को घटना का पता चला तो खुद कोतवाली पहुंच गए। आईजी रतनलाल डाँगी और कप्तान अमित काँबले भी कोतवाली भी मामले की गंभीरता को देखते थाने आ गए। डांगी कल सरगुजा में ही थे।
विधायक बृहस्पति सिंह के मुताबिक, उनका फॉलो वाहन संजय पार्क के पास तेज़ी से उनके वाहन के पास आने की क़वायद में आगे आया तभी वहाँ मौजूद अन्य वाहन के युवाओं ने फॉलो वाहन का पीछा किया और स्थानीय बंगाली चौक पर गाड़ी रोक, चाभी छिन तोड़फोड़ की और जवानों से दुर्व्यवहार किया। विधायक बृहस्पति सिंह का दावा है कि, दुर्व्यवहार करने वाले लोगों ने तोड़फोड़ के दौरान उनके लिए भी पूछताछ की।
विधायक बृहस्पति सिंह इस घटना के बाद तुरंत कोतवाली पहुँच गए। घटना की सूचना पर आईजी रतन लाल डांगी और कप्तान अमित कांबले भी थाने पहुँच गए। प्रार्थी सुदर्शन सिंह की ओर से घटना को लेकर धारा 341, 186, 294, 506, 353 और एक्ट्रोसिटी एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। FIR में आरोपी के रुप में सचिन सिंहदेव, धन्नो उरांव, संदीप रजक के नाम शामिल हैं। FIR में बताया गया है कि सचिन सिंहदेव ओव्हरटेक किए जाने की वजह से आगबबूला हुए।
बात दें कि सचिन सिंहदेव, सरगुजा महाराज व स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव के नजदीकी रिश्तेदार परिवार से आते हैं। इस घटना की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कप्तान कांबले से बात की और कहा कि “घटना किसी सूरत स्वीकार नहीं है, जो क़ानून कहे उसके अनुरुप कार्रवाई हो।”
विधायक को जान का खतरा
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के आदिवासी नेता और विधायक बृहस्पति सिंह ने आरोप लगाया है कि सूबे के स्वास्थ्य और पंचायत मंत्री टीएस सिंह देव उनकी हत्या करवाना चाहते हैं। बृहस्पति ने कहा कि आदिवासी विधायकों पर हमला कर वह मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर 4 – 5 विधायकों की हत्या करवाकर वह मुख्यमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं तो उन्हें मुबारकबाद है। रमानुजगंज, बलरामपुर विधायक बृहस्पति सिंह के काफिले पर हुए मामले ने तूल पकड़ लिया है। तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी छत्तीसगढ़ का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। रात से ही स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पर निशाना साध रहे बृहस्पति सिंह ने 25 जुलाई को देर शाम रायपुर में ये कहकर सनसनी फैला दी कि वो उनकी हत्या भी करवा सकते हैं। यही नहीं रामानुजगंज विधायक बृहस्पत सिंह ने तो तत्काल टीएस सिंहदेव को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग भी कर दी।
सोनिया-राहुल से मांगी मदद
कांग्रेस के आदिवासी नेता बृहस्पति सिंह ने कहा कि कुछ समय पहले ही मैंने कहा था कि, छत्तीसगढ़ के अगले मुख्यमंत्री का फैसला हाईकमान करेगा, इसी बात को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मुझसे नाराज हैं और मेरी कॉल का जवाब तक नहीं दे रहे हैं। इसके बाद से ही उनके लोग मेरी हत्या की साजिश रच रहे हैं, क्या ऐसा बयान देना मेरी गलती थी? अब बृहस्पति सिंह ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से इस मामले में दखल देने की अपील की है। हालांकि हैरानी की बात ये रही कि जिस वक्त प्रेस कांफ्रेंस ली गई, उसके 10 मिनट बाद ही कांग्रेस विधायक दल की बैठक होने वाली थी, जिसमें मुख्यमंत्री, प्रदेश प्रभारी पुनिया, प्रभारी सचिवों सहित पूरा मंत्रिमंडल, पूरा कैबिनेट और तमाम लोग मौजूद थे, बावजूद पार्टी फॉरम से अलग हटकर बृहस्पति सिंह ने सार्वजनिक तौर पर ना सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस ली, बल्कि सिंहदेव के खिलाफ आग भी उगला।
विधायक दल की बैठक में भाग लेने से पूर्व रायपुर स्थित अपने बंगले में बृहस्पति सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान कांग्रेस के 25 से ज्यादा विधायक भी बृहस्पति सिंह के साथ बंगले में मौजूद रहे। इसमें आदिवासी विधायक के साथ-साथ अन्य विधायक भी थे। सरगुजा और बस्तर के बहुत से विधायक, बृहस्पति सिंह के साथ खड़े रहे। हालांकि विधायकों की तरफ से ये कहा गया कि वो सभी बृहस्पति सिंह का हालचाल लेने आए हैं, लेकिन स्पष्ट था कि पूरा मामला शक्ति प्रदर्शन का ही था।
फ्लैश्बैक!
बृहस्पति सिंह ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पक्ष में बयान दिया था, इसलिए उनके ऊपर हमला करवाया गया है। बृहस्पत सिंह ने कहा कि मैंने कुछ दिन पहले मीडिया में बयान दिया था कि भूपेश बघेल ढ़ाई साल किया 20 – 25 साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे, इसी बयान से वो (टी एस सिंहदेव) बौखलाए हुए हैं, चूंकि वो मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं, इसलिए उन्हें ये बयान अच्छा नहीं लगा होगा, इसलिए मुझपर हमला कराया गया है। सोनिया और राहुल गांधी से शिकायत कर रहा हूँ। विधायक दल की बैठक में अपनी बात रखूँगा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया, विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष से मैं शिकायत करूंगा। मुझे लगता है कि जिससे सरकार की छवि खराब हो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि इस मामले में कल देर रात ही सिंहदेव का बयान आ गया था। उन्होंने साफ कहा था कि इस मामले में जो भी शामिल हों, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया था। बृहस्पति सिंह के इस आरोप पर सिंहदेव ने कहा है कि, वे भावनाओं में बह कर, किसी दबाव में ऐसा बयान दे रहे हैं। मेरे लिए छत्तीसगढ़ का एक एक निवासी महत्वपूर्ण है और मैं सभी से परस्पर स्नेह करता हूँ।
विधानसभा के पहले दिन हुआ वो जिसकी उम्मीद थी
विधायक बृहस्पति सिंह के आरोप जिसमें कि उन्होंने मंत्री टी एस सिंहदेव पर आरोप लगाया कि, मंत्री सिंहदेव हत्या कराना चाहते हैं। इस मसले को लेकर भाजपा ने जमकर हंगामा किया है। भाजपा की ओर से सदन में विधायक बृहस्पति सिंह के आरोप को समर्थन में कहा, “विधायक की जान की क़ीमत पर सदन में बात नहीं होगी, हम सदन में बात नहीं कह पाएंगे, यह विधायिका पर हमला है”
भाजपा की ओर से अजय चंद्राकर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि “इस मसले में दोनों पक्ष सदन के सदस्य हैं, अध्यक्ष इस पर निर्देशित करें कि सदन की समिति जाँच करे”। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि, “राजनीतिक इतिहास में यह ऐसी पहली घटना है, यह कांग्रेस ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें सरकार की ओर से कथन आना था, ऐसी घटना में सूक्ष्म जाँच होनी चाहिए कि किसके आश्रय में जनप्रतिनिधि यहाँ आकर अपनी बात कहेंगे”। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सदन में कहा कि, “विधानसभा अध्यक्ष विधानसभा समिति से जाँच कराएँ। हमारे विधायक को जान का ख़तरा है, यह संगीन मामला है, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। यदि मंत्री ने किया है तो जवाबदेही तय हो और यदि ऐसा नहीं है तो कौन है इसके पीछे तय हो”
विधायक बृहस्पति सिंह के मामले में हंगामे के बाद पाँच मिनट के लिए स्थगित करने के बाद सदन की कार्यवाही शुरु हुई। शुरु होते ही विपक्ष ने फिर हंगामा शुरु कर दिया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने वरिष्ठ विधायक डॉ रमन सिंह से कहा कि “आप पंद्रह साल के मुख्यमंत्री रहे हैं, प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत है दोनों पक्षों की सुनना चाहिए.. बताईए क्या यह सही है कि या एक पक्ष ही सुनना चाहिए”। इस पर डॉ रमन सिंह ने कहा कि “यह प्रदेश के इतिहास में अति विशिष्ट प्रकृति का मसला है, इसलिए सारे विधायक उत्तेजित हैं और माँग रख रहे हैं“।
शोरगुल हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष महंत ने व्यवस्था दी, “अब तक विधायक ने मुझे कुछ नहीं कहा, विधायक ने सदन में कुछ नहीं कहा है, मुझे यह मसला विपक्ष ने बताया और इसलिए मैं सत्ता पक्ष से पूछूँगा”। इस पर विपक्ष ने असंतोष प्रकट करते हुए विधायक की बात सदन में कहे जाने का आग्रह दोहराया और उसके बाद शोरगुल होने लगा। इस बीच सदन के नेता भूपेश बघेल ने कहा “आप लोगों ने कहा, तब हम शांति से सूनते रहे थे, अब व्यवस्था हमें जवाब देने की है, निर्देश हैं कहने दीजिए”। लेकिन विपक्षी हंगामा जारी रहा। शोरगुल के बीच विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक स्थगित कर दी।
सदन में भोजनावकाश के बाद जबकि कार्यवाही शुरु हुई तो विपक्ष के तेवर कुछ नरम हुए और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, “यह विधायक पर हमले का मामला है, जिसमें मुख्यमंत्री पद नाम का भी ज़िक्र है, हम आपसे चाहते हैं कि आप निर्णय करें, पर यह सुनिश्चित हो कि भविष्य में ऐसी घटना ना हो”। इस के बाद विधानसभा अध्यक्ष महंत ने कहा, “मैंने पहले ही कहा था, मैंने आपकी बात सुन ली है, अब सत्ता पक्ष की सून लेता हूँ, मुख्यमंत्री भी आ गए उन्होंने गृहमंत्री को पक्ष रखने कह भी दिया था। अब इस विषय पर सरकार का पक्ष कल लूँगा”।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के ढाई साल पूरे हो रहे हैं और ऐसे में अटकले हैं कि जल्द राज्य में नया सीएम चुना जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे होंगे। स्वराज मिशन ने जब कई लोगों से इस विषय पर बात कि तो, प्रतिक्रिया मिली कि, ऐसा प्रतीत होता है कि, बृहस्पति सिंह के इस प्रकरण के पीछे कोई षडयंत्र है, क्योंकि प्रदेश प्रभारी और प्रभारी सचिवों की राजधानी में मौजूदगी के बाद भी पीड़ित विधायक का प्रेस कान्फ्रेन्स लेना, विधायक दल की बैठक में इतने गंभीर आरोप पर कोई चर्चा ना होना, बृहस्पति सिंह के निवास पर लगभग 20 विधायकों का जमावड़ा, पार्टी फॉरम में बात रखने के बजाय, विपक्ष को बैठे बिठाए मुद्दा दे देना वो भी विधानसभा के मानसून सत्र के शुरुवात के ठीक पहले, आरोप एक ऐसे दिग्गज नेता पर जोकि अपनी मृदुभाषा, सौम्य स्वभाव और शहिष्णुता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं!
हालांकि, ये वाकया पहले से ही विपत्तियों का सामना कर रही काँग्रेस पार्टी के लिए यकीन छवि खराब करने वाला है क्योंकि, देश में छत्तीसगढ़ ही एक ऐसा राज्य है, जहां काँग्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा मजबूत है। लेकिन अगर यहाँ भी काँग्रेस में गुटबाजी चरम सीमा पर है तो 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में नतीजा क्या होगा, ये कोई अबोध बालक भी समझ सकता है। उधर विपक्ष का कहना है कि अगर प्रदेश में जनता द्वारा चुना हुआ विधायक भी सुरक्षित नहीं है तो एक आम व्यक्ति कैसे सुरक्षित रह सकता है, इस स्थिति के जिम्मेदार सीधे तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री और विधायक दल का नेता होने के नाते भूपेश बघेल कि ही है। इधर पता चल रहा है कि प्रदेश कॉंग्रेस प्रभारी पी एल पुनिया ने अपनी दिल्ली वापसी रद्द कर दी है और विधानसभा गए हैं।

