रायपुर : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद का एक मामला प्रकाश में आया है जहाँ आई.एस.बी.एम. यूनिवर्सिटी गरियाबंद द्वारा पैसों के बदले बगैर पढ़े लिखे छात्रों को मार्कशीट ( फर्जी ) प्रदाय करने का आरोप लगाया गया है। दरअसल छत्तीसगढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता और काँग्रेस नेता संजीव अग्रवाल ने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाने में आई.एस.बी.एम. यूनिवर्सिटी गरियाबंद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की शिकायत की है।

उन्होंने ने कहा- आई.एस.बी.एम. यूनिवर्सिटी गरियाबंद ( छ.ग. ) के चांसलर डॉ. विनय अग्रवाल, वाईस चांसला डॉ . डी.एम. देशपाण्डे , रजिस्ट्रार डॉ . बी.पी.भोल, रिता व रतनेश मिश्रा द्वारा आपस में सांठगांठ कर रूपये के बदले बगैर पढ़े लिखे छात्रों को मार्कशीट ( फर्जी ) छापने तथा प्रदाय करने व देश के होनहार छात्र – छात्राओं का भविष्य खराब करने के अपराधिक कृत्य की जांच कर 420 , 467 , 468 , 471 , 34 के तहत् अपराध दर्ज करने बाबत् लिखित आवेदन प्रस्तुत है।

उन्होंने कहा- देश में शिक्षा के स्तर में सुधार हेतु निजी विश्वविद्यालयों को सरकार द्वारा संचालन की अनुमति दी गई है लेकिन कई विश्वविद्यालयों ने विश्वविद्यालय को रूपये लेकर फैर्जी मार्कशीट व डिग्री छापने का व्यापार (धंधा ) बना रखा है। विश्वविद्यालयों द्वारा किये ज रहे इस आपराधिक कृत्य की जानकारी होने पर जो देश के होनहार प्रतिभाशाली छात्र – छात्रा के भविष्य को बर्बाद, खराब कर पैसे कमाने में लगे हुये है जिसके कारण अयोग्य भी आर प्रतिभाशाली होनहार के भविष्य ख़राब कर नौकरियों कर रहे हैं, ये विश्वविद्यालय किसी कोर्स की मार्कशीट व डिग्री पैसे लेकर विना पढ़े छाप कर दे रहे हैं ।

आई.एस.बी.एम.यूनिवर्सिटी गरियाबंद के खिलाफ सिविल लाइन रायपुर में केस दर्ज...रूपये के बदले बगैर पढ़े लिखे छात्रों को मार्कशीट देने का आरोप
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