छत्तीसगढ़ में पिछले कई दिनों से सरकारी आदेश पत्र वायरल होने की खबरें प्रायः प्रचलन में आ गई हैं। विभिन्न विभागों से अलग-अलग प्रकार के सरकारी आदेशों के पत्र वायरल होते हैं और बाद में सरकार और संबंधित विभागों द्वारा इसका खंडन कर दिया जाता है। यहां तक कि कई आदेश एक दिन में ही वापस भी ले लिए जाते हैं।
इसी कड़ी में एक और आदेश पत्र वायरल हुआ है, जिसकी सच्चाई क्या है यह शोध का विषय है। यह पत्र छत्तीसगढ़ प्रदेश के सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से जारी किया गया है, जिसमें स्वयं पुलिस अधीक्षक जिला सुकमा छत्तीसगढ़ के हस्ताक्षर हैं।
आइए जानते हैं कि इस आदेश पत्र का संदर्भ क्या है और किस विषय में इसे प्रेषित किया गया है।
विषय है, छत्तीसगढ़ के जिला सुकमा में ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित धार्मिक गतिविधियों के संबंध में।
इस आदेश पत्र को पुलिस अधीक्षक सुकमा द्वारा समस्त पुलिस अनुविभागीय अधिकारी जिला सुकमा और समस्त थाना प्रभारी जिला सुकमा छत्तीसगढ़ को लिखा गया है।
इसमें उल्लेख किया गया है कि सुकमा जिले में ईसाई मिशनरियों और ईसाई धर्म में परिवर्तित हुए आदिवासियों द्वारा जिले में घूम घूम कर वहां के निवासियों को ईसाई धर्म के फायदे बताकर उन्हें अपना धर्म परिवर्तन करने के लिए लालच दिया जा रहा है और उन्हें उकसाया जा रहा है।
इस पत्र में पुलिस अधीक्षक ने जिले के कुछ स्थानों से इस प्रकार की सूचनाएं मिलने का उल्लेख भी किया है और आशंका भी जताई है कि इसके कारण क्षेत्र में धार्मिक उन्माद भी पैदा हो सकता है।
इसीलिए उन्होंने अपने अधीनस्थों को इस विषय में अपने सूचना तंत्र को प्रभावी रूप से सक्रिय रखने के लिए कहा है। साथ ही ऐसे ईसाई मिशनरियों और धर्म परिवर्तित आदिवासियों की गतिविधियों पर भी नजर रखने के लिए कहा है।
यह आदेश पत्र 12 जुलाई 2021 को लिखा गया था और आज 15 जुलाई 2021 है।

Viral Letter
यह लेटर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ईसाई धर्म समुदाय के प्रतिनिधि नितिन लॉरेंस ने स्वराज मिशन से बातचीत में कड़ी आपत्ति जताई है और मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह स्वयं इस विषय को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्रवाई करने के निर्देश देवें, क्योंकि यह एक धर्म विशेष से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

नितिन ने कहा कि जहां तक बात प्रलोभन और लालच की है तो, छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज पहले से ही उपेक्षित है, तो ऐसी स्थिति में वह क्यों और कहां से दूसरों को प्रलोभन देगा? वैसे भी ईसाई धर्म में यह नहीं सिखाया जाता है कि दूसरे धर्म से द्वेष किया जाए या दूसरे धर्म के लोगों को धर्म परिवर्तन करने हेतु लालच या प्रलोभन दिया जाए।
अब विषय यह है कि अगर यह पत्र सही है तो कांग्रेस कमेटी द्वारा बनाई गई ‘फेक न्यूज़ कमेटी’ को इसे संज्ञान में लेना चाहिए और अगर यह पत्र सही नहीं है तो किस शरारती तत्वों ने इतनी बड़ी हिमाकत की है उसकी खोज होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे सरकारी आदेश प्रदेश में धार्मिक उन्माद पैदा कर सकते हैं जिसके चिंता स्वयं सुकमा के पुलिस अधीक्षक ने भी जताई है।
लेकिन अगर यह वायरल आदेश पत्र फर्जी है तो 3 दिन से किसी भी संबंधित व्यक्ति ने इस पर कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया? यह बड़ा सवाल है। खैर जो भी हो सच्चाई सामने आनी चाहिए।
आपको बता दें कि स्वराज मिशन ऐसे वायरल पत्र और आदेश की पुष्टि बिल्कुल नहीं करता। लेकिन स्वराज मिशन सदैव सच के साथ खड़ा रहेगा और आपकी बात करता रहेगा।
स्वराज मिशन है आपकी आवाज…







