आरटीआई कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल युवा पीढ़ी के भविष्य की रक्षा के लिए एक के बाद एक युनिवर्सिटियों के पैसों के बदले डिग्री देने के मामले में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे हैं।
कल ही विश्विद्यालय अनुदान आयोग (केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत) के संयुक्त सचिव, डॉ सुरेंद्र सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को भोपाल की डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन युनिवर्सिटी के द्वारा छत्तीसगढ़ के एक विधायक, डॉ विनय जैसवाल की पैसों के बदले डिग्री जारी करने के मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
और आज पुनः एक दूसरे प्रकरण, जोकि छत्तीसगढ़ के आईएसबीएम युनिवर्सिटी द्वारा हत्या के आरोप में सजा काट रहे कैदी के नाम पर पैसों के बदले डिग्री जारी करने के खुलासे में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, रायपुर को जांच के आदेश दिए हैं।

आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार के शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस मामले को देखें और संजीव अग्रवाल द्वारा उठाए गए मुद्दे पर उचित कार्रवाई करते हुए उन्हें शीघ्र अति शीघ्र अवगत कराएं। हालांकि छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में इस विषय में जांच शुरू कर दी है और स्वराज मिशन ने अपने पाठकों को बताया था कि इस विषय में दोषी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और संजीव अग्रवाल का बयान दर्ज किया जा चुका है, जिससे संजीव अग्रवाल संतुष्ट भी हैं।


