रायपुर के आरटीआई कार्यकर्ता और काँग्रेस नेता संजीव अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए मीडिया के माध्यम से एक बेहद ही संवेदनशील और गंभीर मामले को उजागर करते हुए बताया है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित श्री नारायणा अस्पताल जिसके निदेशक डॉ सुनील खेमका हैं, ने अपने कर्मचारियों को आज के मेडिकल इमरजेंसी के दौर में सरकार के निर्देशों की अवहेलना करते हुए तानाशाही फ़रमान जारी किया है जिसमें उन्हें घर बैठने का नोटिस दिया गया है जिसके बदले में वो अपने कर्मचारियों को केवल मार्च तक का चेक प्रदान करेंगे। 

संजीव अग्रवाल ने सभी का ध्यानाकर्षण करते हुए बताया कि एक तरफ जब प्रदेश में एस्मा लगा हुआ है तो इस मेडिकल इमरजेंसी के दौर में आपातकालीन सर्विसेस में जो भी लोग आते हैं वह छत्तीसगढ़ की जनता के लिए उनके स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए 24 घंटे तत्पर हैं। लेकिन डॉ सुनील खेमका जिनका अस्पताल श्री नारायणा हॉस्पिटल स्वयं ही सरकारी ज़मीन पर बना हुआ है वे स्वयं डॉक्टर होते हुए भी अपने कर्मचारियों को ऐसा तानाशाही फ़रमान सुना रहे हैं। क्या उन्हें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के दिए गए आदेशों का ज़रा भी डर नहीं है? या फिर वे यह समझ रहे हैं कि वो अपनी मनमानी करते रहेंगे और प्रशासन कुछ नहीं कर सकता। 

संजीव अग्रवाल ने कहा कि यह बेहद ही दुखद है कि ऐसे समय में जब लोगों को मेडिकल स्टाफ की ज्यादा जरूरत है देश में COVID-19 कोरोनावायरस की इतनी बड़ी महामारी फैली हुई है, डॉ खेमका का श्री नारायणा हॉस्पिटल कितनी गैर ज़िम्मेदाराना हरकतें कर रहा है। जबकि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति जोकि आपातकालीन सेवाओं में आता है वह ऐसे इमरजेंसी के दौर में कार्यरत रहेगा और अपनी सेवाएं देता रहेगा। लेकिन डॉ सुनील खेमका को शायद यह बात समझ में नहीं आ रही है। 

संजीव अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल से अपील की है कि ऐसे गैर जिम्मेदाराना रवैया के लिए सिराणा हॉस्पिटल को तुरंत सरकार अपनी कस्टडी में ले और डॉ सुनील खेमका के ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई करते हुए सरकार के नियमों का और आदेशों का उल्लंघन करने के लिए व अपने कर्मचारियों का हक मारने के लिए अपराध दर्ज करने के बाद कठोर से कठोर सजा दे और उनका लाइसेंस भी रद्द कर दे। क्योंकि डॉक्टर सुनील खेमका हमेशा कुछ ना कुछ ऐसा तानाशाही रवैया करते हैं जिससे आए दिन उनकी कंप्लेंट आती रहती है। जैसे मृतक की बॉडी को रोक देना, उनके परिवारजनों से पैसा वसूल करना, इलाज के लिए गरीबों का दोहन करना आदि। 

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