ट्रिपल इंजन की सरकार के बावजूद रायपुर निवासी हो रहे हैं परेशान –
छत्तीसगढ़ में ट्रिपल इंजन की सरकार है। मतलब केंद्र, राज्य और निगम, तीनों ही जगह पर भाजपा की सरकार है। लेकिन छत्तीसगढ़ की उपेक्षा क्यों हो रही है, यह समझ से परे है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की बात करें तो यहाँ रोड, नाली, बिजली, पानी की समस्या चरम पर है।
रास्तों पर गड्ढे या गड्ढों में रास्ते!
रायपुर में एक जमाने में खासकर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में रास्ते बहुत अच्छे थे। लेकिन आज यह समझ नहीं आ रहा है कि रायपुर में रास्तों पर गड्ढे हैं या गड्ढों में रास्ते? सड़कों का हाल इतना खराब है कि दो पहिया वाहन से चलने वाले लोग कई बार इन गड्ढों के कारण एक्सीडेंट का शिकार हो जाते हैं। साथ ही इसके कारण ट्रैफिक भी बड़े पैमाने पर जाम हो जाता है जिसके कारण लोगों के गाड़ियों में ईंधन की खपत भी ज्यादा होती है और प्रदूषण भी ज्यादा फैलता है। सड़कों का तो यह हाल है कि अगर कोई गर्भवती महिला ऐसे रास्तों से गुजर जाए तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी डिलीवरी हो जाए। लेकिन ना तो शासन को और ना ही प्रशासन को इसकी सुध लेने की फुर्सत है।
नालियों का बुरा हाल –
राजधानी रायपुर में नालियों का बुरा हाल है। नालियों की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण जल निकासी की समस्या रायपुर में चरम पर है जिसके कारण रास्ते, घर, व्यापारिक प्रतिष्ठान आदि जलमग्न हो जाते हैं। लेकिन आज तक रायपुर में किसी भी सरकार ने सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। अब इन एक तरफ नालियों की उचित व्यवस्था नहीं है और दूसरी तरफ शहर भर में इन नालियों के माध्यम से कचरा फैल जाता है, जिसके कारण बीमारियां उत्पन्न होती हैं और लोग बीमार पड़ते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था में भी इसके कारण बहुत सी बाधाएँ आती हैं। काश सभी प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों को सरकार की ओर से कार की बजाय टू व्हीलर से चलने का निर्देश होता तो शायद वे आम आदमी का दर्द समझ पाते।
बिजली की समस्या –
वैसे तो हमारा राज्य छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन में सक्षम है। हमारे पास आवश्यकता से अधिक बिजली उपलब्ध है इसीलिए हम दूसरे राज्यों को भी बिजली निर्यात करते हैं। लेकिन जैसा की एक उदाहरण है, “चिराग तले अंधेरा”, शहर के कई हिस्सों में दिन में काम से कम 4 से 5 बार और कई हिस्सों में 10 से 12 बार दिल्ली जाने की शिकायतें आती रहती हैं और यह कभी कबार नहीं, लगभग रोज़ का ही हल हो गया है, इसके कारण जनता बहुत परेशान है। बिजली विभाग द्वारा शिकायत के लिए जो नंबर उपलब्ध कराए जाते हैं, उन नंबरों पर कोई जवाब नहीं देता है। तो आखिर जनता जाए तो कहां जाए? सही समय पर बिजली का बिल भरने के बावजूद अगर आपको बिजली उपलब्ध न हो तो आप किससे शिकायत करेंगे? यह बड़ा प्रश्न है। लेकिन न प्रशासन को और नहीं शासन को इसकी कोई फिक्र है।
पानी की समस्या –
“जल ही जीवन है”, यह हम सभी को पता है, लेकिन यह सब पुस्तकों तक ही सीमित रह गया है, क्योंकि पैसे कमाने की होड़ में व्यक्ति इतना लालची हो गया है कि उसे यह फिक्र ही नहीं है कि हम प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं और जब प्रकृति ही नहीं बचेगी तो यह पैसे किस काम के? रायपुर में लगभग सभी रहवासी क्षेत्र में पानी की समस्या एक बड़ी समस्या है। निगम के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। खासकर गर्मी के मौसम में जल आपूर्ति लगभग सभी क्षेत्र में एक बड़ी समस्या के रूप में उभर कर आती है। लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण कई बिल्डर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं और रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी जरूरत का ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे तो निगम, जनता से वॉटर टैक्स (जल – कर) वसूल करता है लेकिन जल आपूर्ति नहीं कर पाता। अगर सरकार वर्षा जल संग्रहण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) पर ध्यान दें तो यह समस्या बहुत हद तक ठीक हो सकती है, लेकिन सरकार का इस ओर भी ध्यान नहीं है क्योंकि सरकार में बैठे लोगों को जल की कमी कभी नहीं होती।
आखिर दोषी कौन?
अब यह प्रश्न स्वराज मिशन आपसे पूछता है कि आखिर इन समस्याओं के लिए दोषी कौन है?
क्या दोषी जन प्रतिनिधि हैं? या पार्षद हैं? या महापौर हैं? या क्षेत्रीय विधायक है? यह सांसद है? या पूरी सरकार है? या प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी हैं? या मीडिया है? या स्वयं जानता है, जो कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से प्रश्न पूछना ही भूल गई है, केवल जाति, धर्म, समाज, संप्रदाय में बंटकर तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार हो रही है और अभाव व प्रभाव में आकर अपने मताधिकार का दुरुपयोग कर रही है।