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    Home » राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले कांग्रेस पार्टी में घमासान!

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले कांग्रेस पार्टी में घमासान!

    Swaraj MissionBy Swaraj MissionJun 24, 2025Updated:Jun 24, 2025 Chhattisgarh No Comments8 Mins Read
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    रायपुर, छत्तीसगढ़। दिनाँक : 24-06-2025 –

    कांग्रेस पार्टी की बात हो और अंतर कलह उजागर ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता!

    ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि बार-बार कांग्रेस पार्टी में अंतर कलह की खबरें समय – समय पर उजागर होती रहती हैं।

    प्रभारी पर नेता भारी!

    23 जून 2025 को छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी के प्रभारी सचिन पायलट ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान पार्टी के नेताओं की बैठक ली। बैठक में छत्तीसगढ़ की भाजपा की मौजूदा विष्णु देव सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने पर चर्चा की गई। पायलट ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ वरिष्ठ नेताओं की राय जानी। लेकिन चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने ही नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए उन पर आरोपों की लड़ी लगा दी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पार्टी में अनुशासनहीन पदाधिकारियों पर अंकुश लगाने में असमर्थ हैं। वे संगठन का भार उठा नहीं पा रहे हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर आक्रामक नहीं हैं और सरकार को घेरने में असमर्थ हैं।

    यह खबर आग की तरह मीडिया के माध्यम से पूरे प्रदेश में फैल गई। सभी अखबारों ने इस खबर को विस्तार से प्रकाशित किया।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रदेश दौरे से पहले! प्रभारी के लिए बड़ी चुनौती –

    अब प्रश्न यह उठता है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के जुलाई माह में छत्तीसगढ़ दौरे से पहले कांग्रेस में जारी यह घमासान कैसे रुकेगा? छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसी ही चुनौती छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूर्व प्रभारी कुमारी शैलजा के समक्ष भी थी। उन्होंने भी बहुत कोशिश की थी कि कांग्रेस पार्टी में शीर्ष नेताओं के बीच इस अंतर कलह को सुलझा दिया जाए, लेकिन ऐसा हो ना सका। जिसका नतीजा था कि कांग्रेस पार्टी वर्ष 2023 का चुनाव हार गई, जबकि उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। क्योंकि वर्ष 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अप्रत्याशित जीत मिली थी और अब तक का सबसे बड़ा मैंडेट मिला था। पी एल पुनिया इस मामले में भाग्यशाली थे।

    अब समझिए कि छत्तीसगढ़ के चार पावर सेंटर का राजनीति करने का तरीका क्या है?

    छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल –

    भूपेश बघेल अपने आक्रामक तेवर वाली राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वे बेहद ही मुखर हैं, साथ ही क्षेत्रवाद की राजनीति करते हैं। वे अपने विरोधियों पर सीधा वार करते हैं और बहुत हद तक अपनी रणनीतिक राजनीति में कामयाब भी हो जाते हैं, फिर चाहे वह विरोधी पार्टियों के नेताओं के विरुद्ध हो या फिर अपनी ही पार्टी के उनके प्रतिस्पर्धी नेताओं के विरुद्ध। यही कारण था कि अपने इस जीवटता के साथ वे वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस हाई कमान द्वारा छत्तीसगढ़ में ढाई – ढाई साल के मुख्यमंत्री के फार्मूले पर भी उन्होंने पूरी तरह से विजय प्राप्त कर ली। वह आखिर तक लड़ते रहे और पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में एक नया छत्तीसगढ़िया वाद उभरा जिसके कारण छत्तीसगढ़ की संस्कृति, छत्तीसगढ़ के व्यंजन, छत्तीसगढ़ का पहनावा और छत्तीसगढ़ के लोगों के विचार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। लेकिन उनके आसपास के लोगों के कारण वह अपने इस वैभव को संभल ना पाए। उनकी सरकार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित योजना बनाने पर बहुत काम हुए, लेकिन कुछ प्रशासनिक अधिकारियों – कर्मचारियों और संगठन में तालमेल न होने के कारण योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर पूर्ण रूप से नहीं हो पाया, जिसके कारण लोगों में असंतोष उभर गया। साथ ही उनके आसपास के लोगों के द्वारा किया गया भ्रष्टाचार उनकी हार का बड़ा कारण बना। उन्हें जानने वाले लोगों की माने तो, वे किसी भी रूप में छत्तीसगढ़ की राजनीति से दूर नहीं होना चाहते, भले ही उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दे दी हो।

    छत्तीसगढ़ के पूर्व नेता प्रतिपक्ष, सरगुजा महाराज टी एस सिंहदेव –

    टी एस बाबा के नाम से प्रसिद्ध, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व नेता प्रतिपक्ष व पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव अपने स्पष्टवादिता और सरल व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 2018 के चुनाव में पार्टी की घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई, तब वे नेता प्रतिपक्ष थे। 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री उन्हें ही बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा ना हुआ। मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे बहुत दूर होती चली गई। बाद में कांग्रेस हाई कमान द्वारा उन्हें ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद देने का आश्वासन दिया गया, जोकि पूरा नहीं हुआ। अंत में उन्हें छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री के रूप में संतोष करना पड़ा। इसका कारण था उनका हाई कमान पर अटूट विश्वास और आस्था, लेकिन परिस्थितियों उनके पक्ष में नहीं हुईं और वे मुख्यमंत्री बनने से चूक गए, साथ ही वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव भी हार गए। उन्हें जाने वाले लोगों का कहना है कि उनके आस-पास परिपक्व लोगों की कमी थी और वह खुद के लिए नहीं लड़े। यदि वह लड़ते तो बहुत से विधायक उनके साथ थे और वह मुख्यमंत्री बन सकते थे। यद्यपि आज भी वे समय-समय पर विभिन्न मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरते नजर आते हैं। उनकी राजनीति करने का तरीका बेहद ही धैर्यपूण, शांत और सौम्य है।

    छत्तीसगढ़ के पूर्व सांसद व पूर्व विधायक, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज –

    छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष दीपक बैज युवा हैं। वे सांसद, विधायक भी रह चुके हैं। साथ ही वे बस्तर अंचल से आते हैं और आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। शायद इन्हीं सब परिस्थितियों के कारण उन्हें कांग्रेस हाईकमान ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी थी। आला कमान को यह लगा था कि वे युवाओं पर अपना प्रभाव डालने में सफल होंगे, आदिवासियों को साधने में कारगर होंगे और बस्तर, जहां से छत्तीसगढ़ की सत्ता की चाबी मिलती है, उस क्षेत्र को भी कांग्रेस-मय बनाने में सफल होंगे। लेकिन उनके अब तक के कार्यकाल में ऐसा हो नहीं पाया। उनके नेतृत्व में जो चुनाव लड़ा गया उसमें उन्हें और पार्टी दोनों को ही नुकसान झेलना पड़ा। साथ ही सूत्र बताते हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से उनकी कम ही बनती है। ऐसे बहुत से कारण हैं जिससे कि दीपक बैज, छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में अब तक उतने सफल नहीं हो पाए। लोगों का मानना है कि उनकी राजनीति बस्तर अंचल के लिए तो ठीक है, लेकिन ऐसा लगता है कि प्रदेश के अन्य संभागों ने उन्हें अपने अध्यक्ष के रूप में अब तक स्वीकार नहीं किया है। देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम से भी उनकी नहीं बनती है। वैसे स्वभाव से वे बहुत मेहनती हैं लेकिन परिस्थितियों के शिकार होते प्रतीत होते हैं।

    छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत –

    डॉ चरण दास महंत का एक लम्बा राजनीतिक सफर रहा है। वे अविभाजित मध्य प्रदेश में मंत्री रहने के साथ ही केंद्रीय मंत्री, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष, सांसद, छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष, विधायक, विधानसभा अध्यक्ष के साथ ही बहुत से महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं। एक जीवन में बहुत कम नेता ऐसे होते हैं जो इतने पदों पर पदासीन हुए हैं। इसका कारण है उनकी सूक्ष्म राजनीतिक समझ व सूझबूझ। वैसे तो सर्वविदित है कि वे रक्षात्मक राजनीति करते हैं। विवादों से दूर रहते हैं, सभी को साथ लेकर चलते हैं, विपक्ष के नेताओं से भी उनके अच्छे सम्बन्ध हैं। विधानसभा में भी तथ्यात्मक तरीके से सरकार को घेरते हैं। मीडिया में भी उनके नपे तुले बयान ही आते हैं। वे सदैव ही सटीक और संतुलित बातें बोलते हैं। अपने मित्रों के बीच वे हँसी मज़ाक भी करते हैं। यही उनकी विशेषता है। उन्हें जानने वाले लोगों का मानना है कि वे व्यवहार से बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं। लेकिन लोग यह भी कहते हैं कि उनके रक्षात्मक राजनीतिक रवैया के कारण ही वे अब तक मुख्यमंत्री के कुर्सी से दूर हैं। वर्ना वह बहुत पहले ही मुख्यमंत्री बन गए होते। छत्तीसगढ़ विधानसभा वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री के दावेदारों में उनका भी नाम प्रमुख था, लेकिन उन्हें विधानसभा अध्यक्ष के पद से ही संतोष करना पड़ा। उनकी धर्मपत्नी डॉ ज्योत्सना महंत भी कोरबा, छत्तीसगढ़ से दो बार की सांसद हैं। सूत्रों की माने तो कांग्रेस के बहुत से वरिष्ठ नेताओं के साथ ही, गांधी परिवार में भी उनकी अच्छी पकड़ है।

    अब ऐसी स्थिति में यह देखना रोचक होगा कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली कौन से संभाग में होती है? क्या वह सरगुजा महाराज के क्षेत्र में होगी या डॉ चरण दास महंत के क्षेत्र जांजगीर चांपा, कोरबा में होगी या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के क्षेत्र दुर्ग में होगी या फिर पीसीसी चीफ दीपक बच के क्षेत्र बस्तर में होगी? 

    जो भी हो यह देखना रोचक होगा कि कांग्रेस के इन चार शक्तिशाली आधार स्तंभों को मजबूती से आधार बनाकर, क्या कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में पुनः सरकार बन पाएगी? कांग्रेस हाई कमान और छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट के सामने यह एक बड़ी चुनौती है।

    सचिन पायलट ने अगर यह कर दिखाया तो वह वास्तव में सबसे बड़े सूरमा के रूप में उभर सकते हैं। 

    नोट : उपरोक्त जानकारी, छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों, कांग्रेसी विचारधारा को मानने वाले लोगों और मीडिया से चर्चा के बाद इकट्ठा की गई है। इसमें किसी व्यक्ति विशेष या स्वराज मिशन चैनल की कोई निजी राय नहीं है।

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