रायपुर, छत्तीसगढ़ / 25 फरवरी 2025 –
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर निवासी, पूर्व पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व समाजसेवी प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने अपने लेख में एक रोचक तथ्य पर ध्यानाकर्षण करते हुए लिखा है कि छः माह में भाजपा के कद्दावर नेता संजय जोशी के रायपुर में दो निजी प्रवास को क्या साधरण प्रकार से देखना चाहिए या फिर इसके कोई और मायने हैं या फिर कई मायने हैं।
आइए पहले थोड़ा संजय जोशी के बारे में जानते हैं –
- संजय विनायक जोशी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंधित एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे लंबे समय तक गुजरात भाजपा के सदस्य रहे और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे।
- राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के रूप में अपने 2001-2005 के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने उस संगठन का नेतृत्व किया जिसने भाजपा को नौ राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू और कश्मीर, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और मध्य प्रदेश) में विधानसभा चुनाव जीतने में सक्षम बनाया।
- संजय जोशी का जन्म नागपुर में हुआ 6 अप्रैल 1962 को हुआ था। वीएनआईटी, नागपुर से मैकेनिकल इंजीनियर बने संजय जोशी प्रशिक्षण से एक इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर थे, लेकिन उन्होंने महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में पूर्णकालिक प्रचारक बनने के लिए इस्तीफ़ा दे दिया।
- उनके संगठनात्मक कौशल को देखते हुए, उन्हें 1988 में गुजरात में भाजपा में शामिल होने के लिए कहा गया, जहाँ पार्टी राजनीतिक रूप से कमजोर थी। उन्हें जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ अच्छे तालमेल के लिए जाना जाता है।
- जोशी गुजरात में भाजपा की राजनीति में एक अग्रणी व्यक्ति बन गए। 1988 से 1995 तक, उन्होंने गुजरात भाजपा के सचिव के रूप में नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर काम किया।
- एक पूर्व सहयोगी, गोवर्धन झाड़पिया ने उनके बारे में कहा है कि वह “अपार क्षमता वाले एक मूक कार्यकर्ता हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा लोकप्रिय और प्रिय हैं।
- जोशी को एक ऐसे कुंवारे के रूप में देखा जाता था जिसने अपना जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया था।
अब यहां ध्यान दें –
24 फरवरी 2025 को अपने निकटतम मित्र राजीव लोचन श्रीवास्तव की माता जी के देहांत पश्चात्, उनसे भेंट करने और उनकी माता जी की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने, संजय जोशी दोपहर दो बजे रायपुर पहुंचे।
हवाई अड्डे पर सैकड़ों समर्थकों द्वारा उनका बड़े ही गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
राजीव लोचन श्रीवास्तव के निवास स्थान पर पहुंचने के बाद उन्होंने लगभग दो घंटे वहाँ पर व्यतीत किए। लेकिन वहाँ भी उनसे भेंट करने वालों का तांता लगा रहा जहां उनसे मिलते हुए कई दूसरी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को भी देखा गया।
तत्पश्चात वे एक पूर्व सांसद और पूर्व राज्यपाल के यहाँ शोक सभा में उपस्थित हुए जहां तमाम राजनीतिक हस्तियों से उनकी भेंट हुई जिसमें विधायक, महापौर और कई राजनीतिक व अन्य वर्गों के लोग थे। (तो क्या उन लोगों को पहले ही संजय जोशी के आगमन की सूचना थी?)
वहाँ से वे अपने लाव लश्कर के साथ एक बड़े रिटायर्ड अधिकारी(जोकि सिख समाज के हैं) के निवास पर जलपान के लिए पहुंचे।
तत्पश्चात वे एक बड़े मदिरा व्यापारी (जोकि सिख समाज के हैं) के निवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि वहाँ भी कई बड़ी हस्तियों से उनकी भेंट हुई जिसमें विपक्षी दल के एक बड़े नेता (जोकि राज परिवार से हैं) भी थे।
जिसके बाद वे रायपुर से दिल्ली जाने के लिए स्वामी विवेकानंद हवाईअड्डे पहुंचे। उनके काफ़िले में बहुत सी गाड़ियाँ थी क्योंकि उन्हें विदा करने बहुत से लोग हवाईअड्डे पहुंचे थे।
सूत्रों के अनुसार वहाँ पर प्रदेश के कई जिलों से कई नवनिर्वाचित पार्षद भी उनसे(संजय जोशी से) भेंट करने पहुंचे।
हवाईअड्डे पर पता चला कि उनका विमान दो घंटे विलम्ब से दिल्ली पहुंचेगा। यहा बात पता चलते ही बहुत से बड़े अधिकारी भी इस अवसर का लाभ उठाने वहाँ उनसे भेंट करने पहुंचे।
अब सोचिए संजय जोशी से मिलने वालों में बड़े व्यापारी, राजनीतिक व्यक्ति, एक पूर्व पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व समाजसेवी, कई अधिकारी आदि क्यों शामिल हैं?
अब यदि आप ध्यान से पूरे घटनाक्रम को देखें तो क्या संजय जोशी का रायपुर प्रवास सामान्य है या इसके कोई या कई मायने हैं। यह आप सोचिए।

