रायपुर, छत्तीसगढ़ – 07 जुलाई 2022 :

पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुंज पांडेय ने अपने जीवन की एक रोचक घटना का जिक्र किया जिसे सोच कर वे आज भी आहत हो जाते हैं। तो आइये उन्हीं के अनुसार समझते हैं पूरी घटना के बारे में।

प्रकाशपुंज पांडेय ने कहा कि, मैं अपने कुछ मित्रों के साथ एक जगह से दूसरी जगह तक प्रवास कर रहा था। रास्ते में देश की राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक आदि विषयों पर चर्चा हुई। नुपुर के बयान और कन्हैयालाल की हत्या पर भी चर्चा हुई।

रास्ते में एक जगह अल्पाहार के लिए रुके। ड्राईवर से कहा कि जो खाना है खा लो। गाड़ी किराए की थी लेकिन हम में से किसी ने भी अब तक ड्राइवर का नाम नहीं पूछा था। वहां (रेस्तरां) में भी हिंदुत्व पर चर्चा होने लगी।

हम पुनः अपने गन्तव्य तक पहुंचाने के लिए गाड़ी में सवार होकर आगे बढ़े। हम सभी साथी सनातन धर्म के थे। हममें से एक थोड़ा मुँहफट था और एक हिंदू विचारधारा वाली पार्टी का राष्ट्रीय स्तर का नेता है, तो उसने तपाक से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ टिप्पणी की। हमने तुरंत ही उसे टोका और कोई विवादित बहस न करने के लिए उसे समझाया और उसने माफी मांग कर बात खत्म कर दी।

हंसी-मजाक करते हुए हम शाम तक अपने गन्तव्य पर पहुंच गए। गाड़ी से उतर कर होटल की प्रक्रिया पूरी कर हम अपने कमरे में पहुंचे। होटल के स्टाफ ने हमारे लगेज को हमारे कमरे में रखा, मैंने उसे टिप दिया और हमारे ड्राइवर को हमारे कमरे में भेजने को कहा।

ड्राइवर आया, मैंने उसे गाड़ी के किराये की राशि दी और रास्ते भर में उसके अच्छे व्यवहार के लिए कुछ राशि ऊपर से भी दी। वह खुश हुआ और जाने लगा। जाते-जाते मैंने उसका नाम पूछा। वह थोड़ी देर चुप रहा और एक नजर हम सभी को देखते हुए बड़े ही अन्यमनस्क मन से कहा कि “सर मेरा नाम अब्दुल रहमान खान है। लेकिन सर मैं हिन्दू धर्म की बहुत इज्ज़त करता हूँ।”

उसके जाने के बाद हम सभी दोस्त एक दूसरे को देखते हुए अगले 5 मिनटों तक शांत रहे, मानों हमसे अनजाने में ही सही लेकिन कोई भूल हुई है। 🙄

अब्दुल रहमान खान का चेहरा मैं अब तक नहीं भूल पाया हूँ।

Share.

Comments are closed.