छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निवासी, आरटीआई एक्टिविस्ट संजीव अग्रवाल ने कुछ महीनों पहले भोपाल की, सर्वपल्ली राधाकृष्णन यूनिवर्सिटी के द्वारा पैसों के बदले छत्तीसगढ़ के एक कांग्रेस विधायक की डिग्री बनाने का मामला प्रमुखता से उठाया था। जिसके लिए विधायक डॉ विनय जायसवाल (जिनके नाम पर डिग्री जारी की गई ) ने भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ईमेल द्वारा शिकायत की थी।

इसी प्रकरण के मामले में अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग जोकि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है, ने प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश सरकार, उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग, को इस विषय को संज्ञान में लेते हुए निर्देशित किया है कि वह इस मामले को देखें और संजीव अग्रवाल द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए संजीव अग्रवाल को सूचित करें।

केंद्र सरकार की इस तत्परता के लिए संजीव अग्रवाल ने बड़ी ही खुशी जताई है और उन्होंने मीडिया के माध्यम से कहा है कि आज भी कानून व्यवस्था देश में व्याप्त है यह देखते हुए उन्हें बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि मध्य प्रदेश सरकार का उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग भी इस मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करेगा और सुनिश्चित करेगा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ऐसे धनकुबेर जेल के पीछे हों, ताकि युवाओं का भविष्य बचाया जा सके।

ज्ञात हो कि संजीव अग्रवाल ने डॉ विनय जायसवाल, जो कि कांग्रेस के छत्तीसगढ़ में विधायक हैं, उनकी इस पैसों के बदले डिग्री का मामला 4 महीने पूर्व ही उठाया था जिसके बाद अब सरकार एक्शन में आती दिखाई पड़ती है।

संजीव अग्रवाल ने इस प्रकरण के बाद छत्तीसगढ़ की ही आईएसबीएम यूनिवर्सिटी का भी एक बड़ा खुलासा किया है, जिसने एक हत्या के आरोप में सजा काट रहे मुजरिम का पैसों के बदले डिग्री बना दिया था। वैसे तो छत्तीसगढ़ शासन ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है, अब देखना होगा कि इस जांच में कितने निष्पक्षता बरती जाती है?

Letter send by Sanjeev Agrawal
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